त्रयम्बक भद्र और कपोली को एक कार्य सौंपता है। त्रिशूल नंदीश को जंगल में देखी घटना बताता है। शिवानी को त्रिशूल से पता चलता है कि संभाशिव बच गया है। अस्पताल में सम्राट संभशिव से मिलने आता है।